भारत विश्व गुरु बनने की ओर, संतों की राह ही मार्ग : मोहन भागवत
7 April 2026, 14:55
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Religious
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत का विश्व गुरु बनना तय है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब देश संतों द्वारा दिखाई गई आध्यात्मिक राह पर चलेगा। वह स्थानीय पानीघाट स्थित पहाड़ी बाबा भक्तमाली गौशाला में आयोजित मलूक दास जयंती महोत्सव के कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन मलूक दास जी महाराज की 452वीं जयंती के अवसर पर किया गया। भागवत ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की असली ताकत उसकी आध्यात्मिक परंपरा और संतों का मार्गदर्शन है। इसी आधार पर भारत न केवल खुद आगे बढ़ेगा, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और समृद्धि की दिशा दिखाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन की नींव सत्य और करुणा पर होनी चाहिए। बिना करुणा और सत्य के धर्म अधूरा है। संतों के शब्दों के साथ-साथ उनके भाव को समझकर आगे बढ़ना ही सही मार्ग है। भागवत ने कहा कि हर व्यक्ति संत नहीं बन सकता, लेकिन 142 करोड़ भारतीय अगर शुद्ध और सच्चा जीवन जीने का संकल्प लें, तो देश अपने आप महान बन जाएगा। उन्होंने मलूक पीठ की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि 452 वर्षों से संत परंपरा को जीवंत रखना समाज के लिए प्रेरणादायक है। गौ संरक्षण के विषय पर उन्होंने कहा कि केवल कानून से नहीं, बल्कि समाज में गोभक्ति की भावना पैदा करने से ही गौहत्या रुकेगी। जब देश में जनभावना मजबूत होगी, तो सरकार को भी उसे स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने श्रीराम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पूरे देश में भावना जागृत हुई, वैसे ही गौमाता के प्रति भी जनजागरण आवश्यक है। कार्यक्रम से पूर्व भागवत ने वंशीवट स्थित मलूकपीठ में संत मलूक दास जी की समाधि पर पूजा-अर्चना की और गौशाला में गौ पूजन कर देश के कल्याण की कामना की। मोहन भागवत का यह संदेश स्पष्ट है कि भारत का भविष्य उसकी आध्यात्मिक जड़ों में निहित है, और संतों के मार्गदर्शन में ही देश विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इस मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव, गोरेलाल महाराज, बाबा बलराम दास, लाडली शरण महाराज, फूलडोल महाराज और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज मौजूद रहे।