46 डिग्री की आग में झुलस रहे लाइनमैन, बिना सामान मौत से लड़ रहे संविदाकर्मी… और सिस्टम बना तमाशबीन!
28 May 2026, 13:46
600 views
Civic Issues
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
वृन्दावन की चरमराई बिजली व्यवस्था को लेकर जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोग घंटों की कटौती और बार-बार फुंक रहे ट्रांसफार्मर व केबिलों से परेशान हैं। लेकिन इस पूरे संकट के बीच एक ऐसा वर्ग भी है जो हर रोज अपनी जान हथेली पर रखकर काम कर रहा है। बिजली विभाग के संविदाकर्मी लाइनमैन। सूत्रों के मुताबिक मथुरा जिले के JE समूह ने बड़े अधिकारियों से मुलाकात कर साफ शब्दों में बताया कि फील्ड में काम करने के लिए जरूरी सामान तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बिजली घरों में पैनलों की हालत बेहद खराब है, भीषण गर्मी में पैनल धधक रहे हैं, बंच केबिलें बार-बार जल रही हैं और लाइनें लगातार फॉल्ट दे रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर मार्च तक होने वाला मेंटिनेंस कार्य समय पर क्यों नहीं हुआ? लोगों का कहना है कि जब गर्मी आने से पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त की जानी चाहिए थीं, तब विभाग सोता रहा। अब जब तापमान 45 डिग्री पार कर चुका है तो पूरे सिस्टम की पोल खुल रही है। हैरानी की बात तो यह है कि कई जगह सही लाइनें और उपकरण भी अचानक जवाब देने लगे हैं, जिससे विभागीय तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा मार झेल रहा है संविदा लाइनमैन। क्षेत्र में कहीं भी बिजली गुल हो जाए, तार टूट जाए, ट्रांसफार्मर फुंक जाए या फॉल्ट आ जाए, सबसे पहले जनता का गुस्सा लाइनमैन पर उतरता है। गालियां भी वही सुनता है और जान जोखिम में डालकर खम्भों पर भी वही चढ़ता है। सोचने वाली बात यह है कि आखिर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, बिना जरूरी सामान और मात्र ₹10,000 की तनख्वाह में कोई व्यक्ति अपनी जान कैसे दांव पर लगाए? भीषण गर्मी में तपते खम्भों पर चढ़कर काम करना किसी युद्ध से कम नहीं है। कई संविदाकर्मी लगातार 12-12 घंटे फील्ड में काम कर रहे हैं, लेकिन न सुविधाएं मिल रही हैं और न सम्मान। सबसे दर्दनाक सच यह है कि यदि ड्यूटी के दौरान किसी संविदाकर्मी की मौत हो जाती है तो विभाग मात्र ₹7 लाख का मुआवजा देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। उसके बाद उस परिवार की सुध लेने वाला भी कोई नहीं होता। जिन हाथों से शहर की बिजली चलती है, उन्हीं हाथों के घर अक्सर अंधेरे में डूब जाते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि जनता भी समझे कि हर खराबी के पीछे लाइनमैन दोषी नहीं होता। जब विभाग समय पर उपकरण, केबिल और सुरक्षा संसाधन तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा, तो आखिर फील्ड कर्मचारी क्या करे? वृन्दावन का बिजली सिस्टम इस समय भगवान भरोसे चलता दिखाई दे रहा है। ऊपर बैठे अधिकारी एसी कमरों में बैठकर समीक्षा कर रहे हैं, जबकि नीचे फील्ड में संविदाकर्मी जिन्दगी और मौत के बीच बिजली व्यवस्था संभाल रहे हैं। अगर जल्द ही बिजली घरों की स्थिति नहीं सुधारी गई और कर्मचारियों को पर्याप्त सामान व सुरक्षा नहीं दी गई, तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं।