वृन्दावन में स्नेचरों का राज, पुलिस बनी मूकदर्शक! श्रद्धालुओं की आस्था पर खुलेआम डाका
26 May 2026, 16:01
589 views
Crime
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
धर्मनगरी वृन्दावन इन दिनों अपराधियों के लिए सेफ ज़ोन बनती जा रही है। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर से लेकर केशीघाट और यमुना किनारे तक स्नेचर गिरोह खुलेआम श्रद्धालुओं को निशाना बना रहे हैं, मगर पुलिस की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब वृन्दावन आने वाले श्रद्धालु दर्शन कम और अपने गहने-मोबाइल बचाने की फ़िक्र ज़्यादा करते दिखाई दे रहे हैं। सोमवार सुबह केशीघाट स्थित यमुना मंदिर के सेवायत लवेश महाराज ने स्थानीय लोगों की मदद से पांच संदिग्ध महिलाओं को धर दबोचा। इल्ज़ाम है कि ये महिलाएं संगठित गिरोह बनाकर भीड़ में घुसती थीं और पलक झपकते ही महिलाओं के गले से सोने की चैन काटकर रफ़ूचक्कर हो जाती थीं। सवाल यह है कि जब स्थानीय लोग अपराधियों को पकड़ सकते हैं, तो आखिर पुलिस किस बात की तनख्वाह ले रही है? हद तो तब हो गई जब एकादशी के दिन ठाकुर बांके बिहारी जी के दर्शन करने मुंबई से आई एक वरिष्ठ महिला श्रद्धालु के गले से स्नेचर सोने की चैन उड़ा ले गए। बेचारी पीड़िता इंसाफ की उम्मीद लेकर थाना वृन्दावन पहुंची, लेकिन वहां उसकी फरियाद सुनने के बजाय उसे बिना तहरीर लिए ही चलता कर दिया गया। यह रवैया साफ बताता है कि पुलिस को श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं रह गया है। वृन्दावन में मोबाइल चोरी अब इतनी आम हो चुकी है कि लोग इसे “नया सामान्य” मानने लगे हैं। मंदिरों के बाहर सक्रिय गिरोह बेख़ौफ़ होकर वारदात कर रहे हैं और पुलिस सिर्फ खानापूर्ति में मशगूल दिखाई देती है। सवाल उठता है कि आखिर किसकी सरपरस्ती में ये गिरोह धर्मनगरी की सड़कों पर बेलगाम घूम रहे हैं?
श्रद्धालुओं का कहना है कि वृन्दावन पुलिस अपराध रोकने से ज्यादा मामलों को दबाने में दिलचस्पी दिखा रही है। अगर यही हालात रहे तो वह दिन दूर नहीं जब देशभर में वृन्दावन की पहचान भक्ति से ज्यादा चोरी और स्नेचिंग के लिए होने लगेगी। धर्मनगरी की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। अब प्रशासन को यह तय करना होगा कि वह श्रद्धालुओं की हिफाज़त करेगा या फिर अपराधियों को खुली छूट देकर वृन्दावन की छवि को यूं ही बदनाम होने देगा।