राजकीय बालगृह की सुरक्षा पर सवाल : आखिर 11 मोबाइल और 4 चार्जर कैसे पहुंचे बालिकाओं तक?
6 June 2026, 10:32
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Crime
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
चैतन्य बिहार स्थित राजकीय बालगृह (बालिका) में एक साथ 11 मोबाइल फोन और 4 चार्जर बरामद होने के बाद संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस बालगृह में आवासित बालिकाओं की सुरक्षा और निगरानी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं प्रतिबंधित वस्तुओं का इस तरह पहुंच जाना सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। प्रभारी अधीक्षिका द्वारा थाना वृन्दावन में दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार एक जून की शाम मोबाइल होने की आशंका पर महिला कर्मचारियों ने आवासीय कक्षों की सघन तलाशी ली, जिसमें 11 मोबाइल और 4 चार्जर बरामद हुए। शिकायत में दावा किया गया है कि ये मोबाइल अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र के तहत बालिकाओं तक पहुंचाए गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बालगृह की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है तो इतनी संख्या में मोबाइल और चार्जर परिसर के अंदर कैसे पहुंचे? क्या प्रवेश द्वारों पर निगरानी पर्याप्त नहीं है? क्या नियमित जांच और तलाशी की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित है? या फिर सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही बरती जा रही है? तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ बालिकाओं के माध्यम से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने तथा अन्य बालिकाओं में भय का माहौल पैदा करने जैसी गतिविधियां कराई गईं। यदि यह आरोप सही हैं तो मामला केवल मोबाइल बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थान की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण पर भी बड़ा प्रश्न खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाल संरक्षण के लिए संचालित सरकारी संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि मोबाइल भीतर पहुंचाने वाले लोग कौन हैं और उनकी मदद करने में कहीं संस्थान के अंदर या बाहर का कोई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों एवं संलिप्त बालिकाओं के विरुद्ध बीएनएस की धारा 352, 131, 324(4) एवं 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एसआई अरुण डागर को सौंपी गई है। सवाल उठता है कि बालगृह में प्रतिबंधित मोबाइल फोन आखिर पहुंचे कैसे? सुरक्षा जांच और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या नियमित तलाशी अभियान पहले नहीं चलाए गए? अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मोबाइल पहुंचाने के दावे के पीछे कौन लोग हैं? 128 बालिकाओं वाले संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही किसकी है? अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह केवल कुछ बालिकाओं की अनुशासनहीनता का मामला है या फिर बालगृह की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ी चूक सामने आने वाली है।