वृन्दावन की बदहाल बिजली व्यवस्था को लेकर रंगजी बिजलीघर पहुंचे लोगों का विरोध उस समय विवादों में बदल गया जब पार्षद शशांक शर्मा पर ड्यूटी कर रहे संविदाकर्मी के साथ अभद्रता और हंगामा करने के गंभीर आरोप लगे। घटना के बाद विद्युत विभाग के कर्मचारियों में जबरदस्त रोष फैल गया है। बताया जा रहा है कि पार्षद शशांक शर्मा समर्थकों के साथ रंगजी बिजलीघर पहुंचे थे, जहां बिजली कटौती और लो-वोल्टेज को लेकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की गई। लेकिन आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्षद सीधे कंट्रोल रूम में घुस गए और वहां ड्यूटी पर मौजूद संविदाकर्मियों के साथ ऊंची आवाज में अभद्र व्यवहार किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मामला इतना बढ़ गया कि बिजलीघर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। कर्मचारियों का आरोप है कि जनता के गुस्से का निशाना अधिकारियों की बजाय मौके पर काम कर रहे कर्मचारियों को बनाया गया। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर फील्ड में दिन रात काम करने वाले संविदाकर्मियों को अपमानित कर क्या व्यवस्था सुधर जाएगी ? संविदाकर्मियों ने इस घटना को कर्मचारियों के सम्मान पर हमला बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जान जोखिम में डालकर बिजली व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटना के बाद कर्मचारियों ने एकजुट होकर चेतावनी दी है कि यदि पार्षद के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो सामूहिक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों द्वारा थाना वृन्दावन में तहरीर देने की तैयारी भी की जा रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि जनता की समस्याओं के नाम पर क्या जनप्रतिनिधियों को सरकारी कर्मचारियों से अभद्रता करने का अधिकार मिल जाता है ? वृन्दावन में बिगड़ी बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों में पहले ही गुस्सा है, लेकिन अब इस पूरे विवाद ने जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।