सौ शैय्या बैरियर बना 'खुला दरवाज़ा', परिक्रमार्थियों की जान पर खेल रहा सिस्टम!
31 May 2026, 17:38
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Civic Issues
वृन्दावन | विकास अग्रवाल
धार्मिक नगरी वृन्दावन इन दिनों पुरुषोत्तम मास के चलते लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से सराबोर है। कोई नंगे पैर परिक्रमा कर रहा है, कोई दंडौती देकर ठाकुरजी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहा है। मगर अफ़सोस, जिन महकमों के जिम्मे इन श्रद्धालुओं की हिफाज़त है, वही उनकी ज़िंदगी को ख़तरे में डालने का काम करते दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल सौ शैय्या तिराहा बैरियर को लेकर खड़ा हो गया है। जिस बैरियर पर सामान्य दिनों में स्थानीय लोगों तक की गाड़ियां रोक दी जाती थीं, वही बैरियर पुरुषोत्तम मास में बाहरी चौपहिया वाहनों के लिए मानो खुला दरवाज़ा बन चुका है। आखिर किसकी मेहरबानी से यह बैरियर अपनी अहमियत खो बैठा? किसके इशारे पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ताक पर रखकर वाहनों को शहर के भीतर दाखिल होने दिया जा रहा है? सौ शैय्या तिराहे से छोड़े जा रहे वाहन सीधे अटल्ला चुंगी क्षेत्र में भारी अव्यवस्था और जानलेवा जाम पैदा कर रहे हैं। हजारों परिक्रमार्थी वाहनों के बीच फंसकर निकलने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी दंडौती परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को झेलनी पड़ रही है। सड़क पर लेटकर परिक्रमा कर रहे श्रद्धालुओं के बिलकुल करीब से चौपहिया वाहन गुजर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि हर पल किसी बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वाकई परिक्रमा मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाना चाहता है तो सौ शैय्या तिराहा, मल्टी लेवल पार्किंग और पानीगांव बैरियर पर बाहर से आने वाले वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद करनी होगी। मगर ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। हैरानी की बात यह है कि सौ शैय्या तिराहे पर प्रतिदिन ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस की ड्यूटी भी लगती है। इसके बावजूद पूरे दिन चौपहिया वाहन बेधड़क शहर में प्रवेश कर रहे हैं। कभी-कभार किसी उच्चाधिकारी की भनक लगती है तो कुछ समय के लिए वाहनों को रोका जाता है, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। ऐसा प्रतीत होता है मानो बैरियर सिर्फ दिखावे के लिए लगाया गया हो और नियम-कायदों को खुद जिम्मेदार विभाग ही मज़ाक बनाकर छोड़ चुके हों। अब वृन्दावन की जनता और परिक्रमार्थियों के मन में कई तल्ख सवाल उठ रहे हैं। आखिर किसके हुक्म पर बाहरी चौपहिया वाहनों को शहर में दाखिल होने दिया जा रहा है? सौ शैय्या बैरियर की सख्ती अचानक क्यों खत्म कर दी गई? क्या ट्रैफिक विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?क्या श्रद्धालुओं की जान की कीमत प्रशासन की नज़र में इतनी कम हो गई है? यदि तत्काल प्रभाव से सौ शैय्या तिराहे पर बाहर से आने वाले चौपहिया वाहनों की एंट्री बंद नहीं की गई तो हालात किसी भी दिन बेकाबू हो सकते हैं। उस वक्त अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो जिम्मेदार महकमे सफाई देते रह जाएंगे, लेकिन किसी श्रद्धालु की जान वापस नहीं ला पाएंगे। आस्था की नगरी में श्रद्धालुओं की हिफाज़त सबसे पहली जिम्मेदारी है। सौ शैय्या बैरियर अगर बैरियर नहीं रहा, तो फिर वह सिर्फ लोहे का ढांचा है, जिसका मौजूद होना और न होना बराबर है।