GLA यूनिवर्सिटी में छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, एक महीने में दो छात्रों पर जानलेवा हमले
6 February 2026, 07:42
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Crime
मथुरा | विकास अग्रवाल
प्रदेश की प्रतिष्ठित कही जाने वाली मथुरा की GLA यूनिवर्सिटी में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते एक माह के भीतर यूनिवर्सिटी के गेटों पर दो अलग-अलग छात्रों पर सामूहिक व जानलेवा हमले के मामले सामने आए हैं। दोनों ही मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पहला मामला 2 फरवरी का है। वृन्दावन की गौरानगर कॉलोनी निवासी कृष्णा शर्मा GLA यूनिवर्सिटी में B.Com (Hons) प्रथम वर्ष का छात्र है। कृष्णा पर Gate No. 2 स्थित काव्या कैंटीन के पास दोपहर करीब एक बजे हमला किया गया। आरोप है कि आगरा निवासी अनमोल उपाध्याय, उरई निवासी अंश दयाल, भरतपुर निवासी पीयूष चौधरी समेत एक दर्ज़न अज्ञात युवकों ने कृष्णा को जबरन रोककर बेरहमी से पीटा और जान से मारने की कोशिश की। हमले में छात्र को गंभीर चोटें आईं। पीड़ित की तहरीर पर जैत थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
दूसरा मामला 19 जनवरी का है। मथुरा के औरंगाबाद निवासी कुलदीप सिंह के पुत्र नितिन सिंह, जो B.Tech (Computer Science) तृतीय वर्ष का छात्र है, सुबह करीब 8:20 बजे GLA यूनिवर्सिटी पढ़ने गया था। जैसे ही वह Gate No. 3 पर उतरा, पहले से मौजूद छात्रों ने उसे बुलाया और बाद में अपने अन्य साथियों को भी वहां बुला लिया। आरोप है कि बालाजीपुरम निवासी निशान्त शर्मा, बाद निवासी अतुल उपाध्याय, नवादा निवासी अभिषेक प्रताप, महावन निवासी प्रतीक यादव सहित तीन अन्य छात्रों ने मिलकर नितिन पर जानलेवा हमला किया। आरोपियों ने नितिन को जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी कमर और कोहनी में अंदरूनी चोटें आईं। इतना ही नहीं, उसके बैग में रखा मोबाइल फोन, चश्मा और Lenovo Legion 5 लैपटॉप भी क्षतिग्रस्त कर दिया। आरोप है कि पुलिस में शिकायत करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस मामले में भी जैत पुलिस ने नितिन के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सवाल यह उठता है कि यूनिवर्सिटी के गेटों और कैंटीन जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा गार्ड और निगरानी व्यवस्था कहां थी? छात्रों और अभिभावकों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएँ और बढ़ सकती हैं। अब देखना यह है कि GLA यूनिवर्सिटी प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर हमेशा की तरह मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा।