श्रीजानकीवल्लभ मंदिर का त्रिदिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव हर्षोल्लास से संपन्न
23 January 2026, 21:49
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Religious
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वृन्दावन के केशीघाट स्थित श्रीजानकीवल्लभ मंदिर में इस वर्ष भगवत् प्रतिष्ठा का वार्षिक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह त्रिविध उत्सव श्रीजानकीवल्लभलाल जी के 51वें पाटोत्सव के साथ-साथ श्रीलक्ष्मी वेङ्कटेश्वरजी, श्रीहनुमानजी एवं ब्रह्मर्षि देवराहा बाबा की मूर्ति प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। यह त्रिदिवसीय समारोह वैकुंठवासी अनंतश्री विभूषित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी भगवानदासाचार्य महाराज की कृपा तथा स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हो रहा है।
महोत्सव के प्रथम दिवस प्रातःकाल श्रीलक्ष्मी वेङ्कटेश्वरजी का दिव्य तिरुमंजन (अभिषेक) किया गया। सायंकाल धर्मग्रंथों का सामूहिक पाठ एवं संकीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। द्वितीय दिवस शुक्रवार को श्रीजानकीवल्लभजी का भव्य तिरुमंजन संपन्न हुआ। सायंकाल ‘रामजी का वात्सल्य गुण’ विषय पर विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वृंदावन के प्रख्यात विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके उपरांत भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता जानकी को पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान राम को प्रायः ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ और उनके शौर्य के लिए जाना जाता है, किंतु उनका वात्सल्य गुण अत्यंत विलक्षण है। संतानों, भ्राताओं और शरणागतों के प्रति उनका प्रेम ही उन्हें सच्चा लोकनायक बनाता है। नेत्रपाल शास्त्री एवं स्वामी अनंताचार्य ने कहा कि माता कौशल्या के प्रति पुत्रवत् प्रेम, लक्ष्मण-भरत के प्रति भ्रातृ-वात्सल्य तथा प्रजा के प्रति पिता तुल्य स्नेह भगवान राम के चरित्र को विशेष बनाता है। स्वामी देवनायकाचार्य एवं नरेश नारायणाचार्य ने कहा कि राम का वात्सल्य केवल अपने परिजनों तक सीमित नहीं था, बल्कि केवट, शबरी और जटायु के प्रति भी उन्होंने वही स्नेह प्रदर्शित किया। विद्वानों ने वर्तमान समय में खंडित होते परिवारों के संदर्भ में राम के वात्सल्य गुण को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी में गोविंद दास महाराज, माधव नारायण आचार्य, रामनारायण, रघुनाथ आचार्य, मुकेश शास्त्री, मुकुंद, पियूष, अंकित, सुधीर गौतम, मोनी बाबा, महेश अग्रवाल एवं राम अवतार नरसिंगिया आदि उपस्थित रहे।