योगी सरकार में महिलाओं की हिफ़ाज़त और फ़ौरन इंसाफ़ के दावों के बीच वृन्दावन से एक ऐसा वाक़या सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर संगीन सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक मेहनतकश महिला को अपनी दो महीने की मेहनत की कमाई मांगना इतना महंगा पड़ गया कि कथित बकायेदार युवक ने बीच सड़क पर उसके साथ गाली-गलौज, अभद्रता और मारपीट कर दी। इसके बाद जो हुआ, उसने पुलिस की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए।

छटीकरा निवासी पीड़ित महिला प्रीति का आरोप है कि वह यशोदानन्दन धाम के पीछे रहने वाले हितेश के यहां कई महीनों से साफ-सफाई का कार्य कर रही थी। उसके मुताबिक दो माह की 18 हजार रुपये मजदूरी अब तक बकाया है। कई बार तकाज़ा करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।

आरोप है कि शनिवार रात करीब 8:30 बजे मल्टीलेवल कार पार्किंग के पास एक गेस्ट हाउस में हितेश रूम लगाते दिखाई दिया। प्रीति ने उससे अपनी मेहनत की कमाई मांगी तो कथित तौर पर हितेश बौखला गया और बीच सड़क पर ही अश्लील गालियां देते हुए उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। पीड़िता का कहना है कि उसके कान और कंधे में गंभीर चोट आई है तथा वह दर्द से कराहती रही।

घटना के बाद इंसाफ़ की आस में पीड़ित महिला प्रीति थाना वृन्दावन पहुंची। आरोप है कि वहां मौजूद मुंशी ने तत्काल मेडिकल कराने या कानूनी कार्रवाई शुरू करने के बजाय उसे अगले दिन रविवार को सुबह रमनरेती पुलिस चौकी जाने की सलाह देकर लौटा दिया। दर्द से बेहाल महिला उसी वक़्त थाना वृन्दावन से रमनरेती चौकी पहुंची, लेकिन वहां से उसे केशव धाम चौकी भेज दिया गया। उसका आरोप है कि जब वह वहां पहुंची तो चौकी पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद ही नहीं था।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक घायल महिला रात में थाना वृन्दावन और पुलिस चौकियों के बीच भटकती रहे, उसे तत्काल चिकित्सीय परीक्षण तक न मिले और उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई न हो, तो आम नागरिक पुलिस से इंसाफ़ की उम्मीद किस आधार पर करे?

अब निगाहें आलाधिकारियों पर हैं। क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पीड़िता के आरोपों की सत्यता परखकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी? और यदि पुलिस स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा?

फिलहाल इतना तय है कि मेहनत की कमाई मांगने निकली एक महिला अपने हक़ से ज़्यादा रात में इंसाफ़ की तलाश में भटकती रही।